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बाबाओ से वशीभूत होने की रुग्ण मनोवृत्ति : ‘बाबा-फिलिया’

बाबाओ   से वशीभूत होने की रुग्ण मनोवृत्ति : ‘ बाबा-फिलिया ’ ‘ रुग्ण-मनोरक्षा युक्ति ’ ले जाती है ‘ बाबा-फिलिया ’ की तरफ : मनदर्शन रि...


बाबाओ से वशीभूत होने की रुग्ण मनोवृत्ति : बाबा-फिलिया
रुग्ण-मनोरक्षा युक्तिले जाती है बाबा-फिलियाकी तरफ : मनदर्शन रिपोर्ट

दिनोदिन तेजी से बढ़ता हुआ बाबा बाजार लोगों की एक प्रकार की रुग्ण-मनोरक्षा युक्ति’ या मानसिक दुर्बलता का ही उदाहरण है जिसे मनोविश्लेषण की भाषा में बाबा-फिलिया या बाबा-आसक्ति कहा जाता है | अदभुत कृपा, विशेष कल्याण या सर्वबाधा हरण के नाम पे न केवल देशी बल्कि विदेशी भी बाबा-फिलियासे ग्रसित है | और वो उन बाबाओं की उँगलियों की कठपुतली बन अपने स्वविवेक को दरकिनार कर उनको अलौकिक व दैवीय रूप में मान्यता प्रदान कर रहे है |

मनोगतिकीय विश्लेषण :

मनोविश्लेषक डॉ. आलोक मनदर्शन के अनुसार मनुष्य की मानसिक प्रक्रियाओं से खेले जाने वाले इस खेल में ये बाबाकुछ भी अदभुत या चमत्कारिक नहीं करते, बल्कि मनुष्य का मन ही अवसाद, उन्माद, मनोआसक्ति याओ.सी.डी. अथवा स्किज़ोफ्रिनिया रूपी मनो-रुग्णता’ या मनो-तनाव की स्थिति में बाबारूपी इस आम इन्सान से इस प्रकार आसक्त हो जाता है कि वह उसकी मानसिक गुलामी करने लगता है | रही-सही कसर पूरी कर देता है, प्रायोजित लोक लुभावन व हैरत अंगेज विज्ञापनों द्वारा इन बाबाओं का ग्लैमराईजेशन | दूसरा पहलु यह है कि मनुष्य के मन में एक सामूहिक अवचेतन ( कलेक्टिव सबकान्शस ) क्रियाशील होता है जिससे की लोग जनता की भीड़ को देख कर स्वयं भी उस भीड़ का हिस्सा होने के लिए उतावले हो जाते है |

मनदर्शन-मिशन द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार इस समय अनुमानत: हजारो-करोणों का बाबा-बाजार सक्रिय है, हलाकि इसका बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी छिपा हुआ है |

मनदर्शन मिशन अन्वेषक डॉ. आलोक मनदर्शन के अनुसार मनुष्य की मानसिक प्रक्रियाओं से खेले जाने वाले इस खेल की चपेट में पढ़े-लिखे, अनपढ़, अमीर-गरीब, महिला व पुरुष सभी आते है, जो मन की गूढ़ प्रक्रियाओं से अनभिज्ञ है और मानसिक तनाव व दबाव की अवस्था में है |


बचाव :
स्वस्थ व परिपक्व मन: स्थिति स्वस्थ मनोरक्षा युक्ति से चलायमान होती है जो मनुष्य को सम्यक-आस्था और आध्यात्मिकता की तरफ ले जाता है, जिससे मनोअंतर्दृष्टि का विकास होता है और मानसिक शान्ति और स्वास्थ में अभिवृद्धि होती है | जबकि दूसरी तरफ अपरिपक्व, न्यूरोटिक व साइकोटिक मनोरक्षा युक्तियाँ या मेन्टल-डिफेन्स मैकेनिज्म जो की विकृत व रुग्ण होती है, मनो-अंतर्दृष्टि को क्षीण करते हुए बाबा-फिलिया की तरफ ले जा सकती है |

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